Tuesday, April 17, 2012

आस

                                                                      
संकल्प लिया तो,
जलने दो मशाल,
मशाल से मशाल को जगाने दो,
मनोरथ पूर्ण होने पर,
जब बुझाना पड़े तो,
छोड़ देना एक चिंगारी,
सुलगते हुए,
ताकि -
आह्वान किया था कभी,
इसका एहसास तो रहे,
और दुबारा उठ खड़े होने की,
आस तो रहे।
ऐ माली,
जब चुनने के लिए आओ,
डाली के फूलों को तो -
तो कहीं किसी डाल पर,
छोड़ देना एक फूल,
खिला हुआ,
ताकि -
बाँझ नहीं है पेड़,
उमंगों से हरा-भरा,
झूमता था कभी,
इसका एहसास तो रहे,
और दुबारा खिलने की,
आस तो रहे।
हे ईश्वर !
जब यह जीवन करना हो,
समाप्त तुम्हें मेरा,
तो छोड़ देना एक सांस,
मेरे अंदर,
ताकि -
मेरे जीवित रहने की,
मेरे इंतज़ार करने की,
प्यास तो रहे, 
जो भागता आ रहा है,
सिर्फ एक नज़र देखने को,
गिले-शिकवों को,
दूर कर सकने की,
आस तो रहे।
                                 
                                     ( जयश्री वर्मा )