ज़िन्दगी क्या है ?
क्या ज़िन्दगी सवाल है ?
शायद ये सवाल है------!
मुझे किसने है भेजा?कहाँ से हूँ मैं आया ?
क्या उद्देश्य है मेरा?ये जन्म क्यूँ है पाया ?
कब तक मैं हूँ यहां?और कहाँ मैं जाऊँगा ?
क्या छूटेगा मुझसे?और क्या मैं पाऊँगा ?
अपना कौन है मेरा?और पराया है कौन ?
किससे बोलूँ मैं?आखिर क्यों रहूँ मैं मौन ?
जिंदगी प्रश्नों से बुना इक जाल है।
हाँ !ज़िन्दगी इक सवाल है !
क्या जिन्दगी खूबसूरत है?
शायद ये ख़ूबसूरत है------
अनन्त ब्रह्माण्ड में विचरती पृथ्वी निराली ,
हर अँधेरी रात्रि उपरान्त सुबह की लाली ,
फूलों संग खेलते हुए ये भँवरे और तितली ,
सप्तरंगी इन्द्रधनुष और चंचल सी मछली ,
मधुर झोंकों संग झूमती बाग की हरियाली,
क्षितिज पे अम्बर से मिले धरती मतवाली।
हाँ !ज़िन्दगी खूबसूरत है !
क्या ज़िन्दगी प्यार है?
शायद ये प्यार है------
रिश्तों का प्यार और सारे बंधनों का सार ,
पाने और चाहने की इक मीठी सी फुहार ,
हौसलों से हासिल इक जीत का उल्लास ,
दुःख,सुख,प्रेम का है ये अनोखा अहसास ,
दोनों हाथों में भरके बहार को समेट लेना ,
कुछ प्यार बांटना कुछ हासिल कर लेना।
हाँ !ज़िन्दगी इक प्यार है !
शायद ये तलाश है ------
कभी खुद के अधूरेपन से सुलग सा गया मैं,
हाँ! ज़िन्दगी इक तलाश है!
क्या ज़िन्दगी कहानी है?
शायद ये कहानी है ------
अनादि काल से जीते-मरते असंख्य अफ़साने,
इतिहास के संग जो सुने-कहे गए जाने-अंजाने,
हर जीवन आपस में मिलती-जुलती कहानी है,
स्वयं से स्वयं को रचने की ये कथा अंजानी है,
हमारा भूत और भविष्य ही हमारी ज़िंदगानी है,
आज की हमारी कहानी ये,कल होनी पुरानी है,
हाँ !ज़िन्दगी इक कहानी है !
अपूर्ण,अतृप्त,अनभिज्ञ,क्यों महसूस होता है?
खूब पढ़ा,परखा फिर भी अजब ये रवानी है,
अब भी उतनी ही अनजानी है।





































