ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Thursday, February 25, 2021

सुखद एहसास

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शब्दों का रह-रह कर के,यूँ बातों में बदलना, यहाँ-वहाँ,दुनिया-जहान की,बातों का कहना, यूँही शब्द-शब्द चुनना,और बात-बात बुनना, तुम संग तुममें ...
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Monday, September 7, 2020

ये बातें

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बातों की क्या कहिये,बातों का है अनंत-अथाह संसार, जन्म से मृत्यु तक शब्दों से ही,बंधा है जीने का आधार। ये बातें तोतली ज़ुबान-मा,पा,डा से,शु...
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Tuesday, August 18, 2020

जो उनकी याद आई

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  आज जो उनकी याद आई,तो आती चली गई  शाम ख़्वाबों की बदरी छाई,तो छाती चली गई।   वो मुस्कुराना आँखों में,बहक जाना बातों में ,  और झूठ पकड़े जाने ...
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Monday, July 27, 2020

खुद पे गुरूर

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घुमड़ के,और घिर-घिर,जो मेघ आने लगे हैं, ये तन-मन भिगा के,नई चेतना जगाने लगे हैं, सुलगते हुए भावों को यूँ,शीतल कर डाला है, उम्मीद की नई को...
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Saturday, June 27, 2020

छलकते से सागर

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सुनो तो! लफ्ज़ हैं अनेकों,और ये बातें हैं असंख्य , तुम्हारे,मेरे हृदय के बीच,धड़कते भाव है अनंत , इन भावों को मिल जाने दो,न रहने दो अनजान ...
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Friday, June 19, 2020

हमने छोड़ दिया

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अपने दिल की गहराइयों में,हम डूबे भी उतराए भी,  जो ज़ख्म मिले,कुछ दिखाए,कुछ खुद सहलाए भी,  वो अनजान ऐसे बनके रहे,जैसे कुछ जानते ही न हों, हमने...
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Thursday, June 4, 2020

जुस्तजुएँ हज़ार हैं

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माँ-बाप से चाहत है हर क्षण दुलार की ,   मित्र संग अटूट गलबहियों के हार की ,  हंसी,खेल,लड़कपन,आनंद हो अपार,  बचपन न सहे कभी भी दुःखों का भार,...
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Wednesday, April 15, 2020

आना-जाना लगा रहेगा

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सुख-दुःख हैं जीवन के साथी,ये आना-जाना लगा रहेगा। खुशी आए,जी भरके जी लो, हँस लो,खेलो,उमंगें भर लो, दीप जलाओ,पुष्प बिछाओ, मिल जुल,एक ...
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Wednesday, March 25, 2020

मैं तुमसे मिली थी

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मैं तुमसे मिली थी- सूरज की लाली की गर्माहट में, पुष्प-पंखुड़ी की मुस्कराहट में, कैनवास के रंगों की लकीरों में, शरारत से भरे नयनों के ती...
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Wednesday, March 11, 2020

फर्क कहाँ है ?

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गुलाब लगा हो मंदिर,मस्जिद में या के गिरजाघर में, जब उसका नाम गुलाब ही रहेगा तो फिर फर्क कहाँ है ? जो जन्मा है वो जाएगा भी इस जग से कभी न...
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Wednesday, February 26, 2020

मैं स्पंदन हूँ

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मैं सृष्टि का जना आधा हिस्सा हूँ, इस पूर्ण सत्य का पूर्ण किस्सा हूँ, मैं हर स्त्रीलिंग की पहचान में हूँ, मैं भूत से भविष्य की जान में ह...
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Tuesday, February 18, 2020

आओगे के न आओगो

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ये मौसमों का आवाज़ देना,जगाना,बुलाना,हर पल , और पलकों संग ख़्वाबों की,लुका-छिपी की हलचल , के इन हवाओं का बहना,बिना बंधन हो के बेपरवाह , इ...
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Thursday, February 6, 2020

ऐसा कुछ भी नहीं

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क्यों नहीं कह देते जो कोई,मन में आरज़ू है तुम्हारे, शायद ख़यालात एक जैसे,मिलते हों तुम्हारे-हमारे, के जो कोई पल बेचैन कर गया हो,तुम्हारे ...
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Friday, November 29, 2019

चाहत हो जाती हूँ

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सप्तरंगी इंद्रधनुष, खुश्बुएं हजार किस्म, भिन्न रूप-आकार लिए, खिलती हूँ,खिलखिलाती हूँ, प्रकृति के फूलों की महक सी, मनमोहक बनके दिलों म...
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Friday, November 8, 2019

बहुत कुछ अनकही

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मित्रों !मेरी इस कविता कि कुछ पंक्तियाँ समाचार पत्र " दैनिक जागरण " में छप चुकी हैं , आप लोग भी इसे पढ़ें। रात बड़ी खामोश थी पर...
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Tuesday, September 17, 2019

कुछ-कुछ जाना है

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कलियाँ कब,क्यों चुपके से,फूल बनके महकें ? ये भँवरे गुन-गुन सुन ज़रा,क्या कुछ हैं कहते ? तितलियाँ भी क्यों रंग जादुई,परों में हैं भरतीं ?...
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Monday, September 2, 2019

ज़िन्दगी में ढली मैं

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माँ की कोख में रची मैं,ज़िन्दगी में ढली मैं , पिता की बाहों के पालने में,खेली-पली मैं , आँगन की चिरैया सी,चहक-चहक डोली , मीठी सी मुस्कान ...
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Monday, August 26, 2019

तुम्हारे जाने के बाद

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तुम क्या जानो के ऐसे,तुम्हारे जाने के बाद , कैसा बेबस सा हुआ,ये मेरा मन,ये मेरा तन , के देहरी पर निगाह,ठहर सी जाती है मेरी , जहाँ पे कि ...
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Monday, August 5, 2019

ये क्यों है ?

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ये अपनों के ही दरमियान,खड़ी दीवार क्यों है ? के आज आदमी ही,आदमी का शिकार क्यों है ? मशीनी से जिस्म हुए,भावों के समंदर रीत गए , ये भाई-भा...
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Saturday, July 27, 2019

ऐसे कितने ही जाधव

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न जाने कितने जाधव,कितनी विदेशी जेलों में फंसे हैं, आँखों में झाइयाँ,शरीर है ढांचा,पर बेड़ियों में कसे हैं। ये गालियों और लातों की रोटी स...
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Monday, July 1, 2019

कहाँ से लाओगे ?

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यूँ चाहतों का जाल,भेद कर,तुम कहाँ जाओगे ? जो गर चाहोगे भूलना तो भी,भुला नहीं पाओगे , के हमारा हंसना,रूठना,उलझना,मान-मनुहार , बंध गए हो ज...
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Wednesday, May 29, 2019

बनाते नहीं हैं

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सच्चाई,सुकून,भरोसा,ये जीवन की खुश्बुएं हैं, किसी से गर जो मिले,तो उसे भुलाते नहीं हैं, ख्वाबों में जो खोया निश्छल,मुस्कुरा रहा हो, ऐसी ...
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Monday, April 29, 2019

चिट्ठी तेरे नाम लिखी

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सुन रे प्रिय! मैंने इक चिट्ठी,तेरे नाम लिखी, इक दिन सूना,और अधूरी इक रात लिखी, के जिसमें है व्यथा,कुछ कही,अनकही सी,  कुछ तो है सहनीय,और ...
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Friday, March 15, 2019

सुंदर ख्वाब

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अगर प्यार जो हुआ है तो,हो भी जाने दो, ये दिल जो खिला है तो,खिल भी जाने दो, ये इक तिलस्मयी,दुनिया का आगाज़ है, चाहत को मीठे सपनों में,खो ...
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Monday, March 4, 2019

ये अजीब भटकाव

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रोज सूरज का आना,और दिन का चढ़ना , वही किरणों का धरती पे,धीरे-धीरे बढ़ना , वही सड़कों पे दौड़ते हुए,लोग इधर-उधर , भरते हुए स्कूल-दफ्तर,खाली स...
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Thursday, February 14, 2019

ओ बसंत फिर आए तुम

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अरे ओ बसंत! फिर से आए तुम , इक अजब हलचल सी लाए तुम , तुमने रंग बिखेरे पहले धरती पर , और फिर खुद पे ही इतराए तुम। रंग भरी सी श...
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Monday, February 4, 2019

अच्छा ही होगा

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अच्छा हुआ के जो,तुमने बात बोल दी, के मन की दुखन,मेरे प्याले में घोल दी, यूँ कहने को मैं,तुम्हारा अपना भी नहीं, पर अपना जानके,तमाम गांठे ...
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Wednesday, January 16, 2019

बताऊँ कैसे ?

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कैसे समझाऊं उन्हें यूँ रूठ के जाया नहीं करते , दिल नाज़ुक है,बार-बार यूँ सताया नहीं करते , जो उदास हो चल दिए हम,तो इल्म रहे उनको , लाख च...
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Tuesday, January 1, 2019

नमन आपको

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पुष्प खिलें खुशियों के,जीवन में, उल्लसित विचार हों,अंतर्मन में , अभिनंदन हो इस,नव संघर्ष का, है ये नमन आपको,नव वर्ष का।  राह हो...
Thursday, October 4, 2018

आप चुप क्यूँ हैं ?

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मित्रों मेरी यह रचना "दिल्ली प्रेस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका सरिता अप्रैल-प्रथम 2019" में प्रकाशित हुई है आप भी इसे पढ़ें।...
Tuesday, June 5, 2018

फरेब कैसे हैं

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वो जानते है सब कुछ,पर खुद पे गुमान किये बैठे हैं , दिलों के व्यापार खेलते हैं,और अनजान बने बैठे हैं , मेरे सब्र की इन्तहां भी,कोई कम नह...
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Saturday, March 24, 2018

ढल रहे हैं

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आप पहली मुलाक़ात से ही,मेरे अपने से बन रहे हैं, सुनहरे ख़्वाब मेरे,शब्द बनके कविता में ढल रहे हैं, मेरे ख्यालों के शब्द,प्रश्न बनके मुझसे ह...
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Friday, February 2, 2018

हम करें तो गुस्ताखी

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 मित्रों मेरी यह रचना "हम करें तो गुस्ताखी "सरिता जनवरी (द्वितीय) 2018 में प्रकाशित हुई है। यह आपके सम्मुख भी प्रस्तुत है।  आ...
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Wednesday, August 23, 2017

ऐ वक्त

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ऐ वक्त तेरा आना और फिर,चुपके से गुज़र जाना, आना हमसफ़र बनके और,चोरों सा निकल जाना, ये वक्त,मेरा वक्त है कह,मैंने ही तुझे अपना माना, पर ओ ...
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Thursday, June 8, 2017

वही वादे वही कसमें

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जन्म लेने के साथ ही जन्मी, मेरी पहचान इस दुनिया में, अजब विस्मित करें ये बातें, जीवन मेरा ख्वाहिशें उनकी, तमाम उम्मीदों के संग पालें, ...
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Monday, May 1, 2017

अनजानी,अनदेखी कल्पना

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स्वर्ग की कामना समाई है,हर किसी के मन में, और दुखों से पार,पाना चाहते हैं,अपने जीवन के, धाम दर्शन करके प्रभु के,द्वार जाने की चाह है, स...
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Wednesday, April 19, 2017

आज तो प्रिय मेरा रूठने का मन है

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आज सुनो!प्रिय तुमसे,मेरा रूठने का मन है, बस अपना वज़ूद ढूंढना है,नहीं कोई गम है, तुम्हारा प्यार यूँही,नापने का मन हो चला है, तुम भूले ध्य...
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Monday, April 3, 2017

मुफ्त नहीं मुहब्बत मेरी

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मुफ्त नहीं मुहब्बत मेरी,तुम्हें झुकना होगा, तुम सिर्फ मेरे हो,ये वादा तुम्हें करना होगा, धोखा नहीं चलेगा,प्यार के इस व्यापार में, खुल के...
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Saturday, March 18, 2017

तुम ही बताओ

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ये निगाहें इक अजीब सा ही गुनाह किये जाती हैं, इधर-उधर भटकती सी तुम पे ही ठहर जाती हैं। ये ज़ुबाँ है कि लफ़्ज़ों संग खेलना शौ...
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