ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Tuesday, April 30, 2013

वर्षा की आस

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 मित्रों मेरी यह रचना " वर्षा की आस " आज के समाचार पत्र अमर उजाला ( दिनाँक - 4 /7 /2014, दिन- शुक्रवार ) की पत्रिका  " रूप...
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Saturday, April 27, 2013

तुमसे

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तुम आये तो जैसे कि- ठहरे पानी में,कंकड़ फेंका हो किसी ने, कि जैसे मन बगिया,खिल उठी हो महकी सी, कि जैसे फूल खिले हों,रंग-बिरंगे भावों भरे,...
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Monday, April 22, 2013

मेरा सच्चा मित्र

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मेरे आँगन की गोदी में इक,रहता वृक्ष निराला है, मैंने ये हरा-भरा सा वृक्ष,बड़े ही यत्नों से पाला है, यह मेरा जीवन सत्य बना है,मैं इसका हूँ...
Thursday, April 18, 2013

जीत और हार

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जीतो तो ऐसे- कि जिसमें, पसीना बहा हो तुम्हारा, कि तुमने जो देखा था कभी, वो सपना सच हुआ हो तुम्हारा, कि जिसमें दंभ न हो तनिक भी, कि क...
Monday, April 15, 2013

अनमोल हंसी

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खूबसूरती बढ़ाती है ये,जीवन जीना सिखाती है हंसी, हंसिये,हंसाइये,क्योंकि जीवन सरल,बनाती है हंसी, ईश्वर ने केवल मानव को ही,बक्शी है यह नियाम...
Monday, April 8, 2013

बेबसी

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वक्त के हाथों नचाये गए,हम बेबस से कारिंदे, मन के बोझिल गाँवों बीच,उड़ते यादों के परिंदे, तुम्हारी छवि की कुछ,अस्पष्ट सी फुसफुसाहट, और प्...
Friday, April 5, 2013

गौरैया री

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गौरैया तुम हर फागुन में,न जाने कहाँ से आती हो ? मेरे घर की भीत-सुराख़ में,अपना नीड़ बनाती हो, तिनका-तिनका यहाँ-वहाँ से,ढूँढ- ढूँढकर लाती ह...
Saturday, March 30, 2013

साँसों की डोर

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साँसों की डोर पर इस जीवन के खेल, उजियारे सुख अंधियारे दुखों का मेल। न आना मर्ज़ी से और,न ही जाना मर्ज़ी से, जीवन इक नाटक और पात्रों की ख...
Thursday, March 28, 2013

होली

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इस होली पर्व के इंतज़ार में, इस फागुनी सी हुई बयार में, नव युवाओं के दिल भाव डोलें, रह-रह के मन के राज़ खोलें। जलती होलिका की आग में, ...
Saturday, March 23, 2013

न जाने कहाँ

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तुम चले गए वहाँ, न जानूं मैं, कैसा,कौन सा सफर, न जाने कैसी वो दुनिया,कैसे उसके शाम और सहर ? बस कह दिया-चलता हूँ,कहा सुना सब माफ़ करना, मै...
Monday, March 18, 2013

रूमानी हो जाइये

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होली के कई रंगों में,रंगों के छंद घोल, छंदों संग बहक कर,होली गीत गाइए, छोटा-बड़ा छोड़,अपनत्व बीज रोपकर, हंसिये-हंसाइये,थोड़े रूमानी हो जा...
Wednesday, March 13, 2013

बापू मुझे आने दो

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हंसने दो हँसाने दो,नए गीत सार्थक बनाने दो, सृष्टि की देन हूँ मैं,मुझे जीवन गुनगुनाने दो, नन्ही सी निर्दोष हूँ,पापा-मम्मी तो बुलाने दो, ...
Monday, March 4, 2013

पुनर्जन्म

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पत्ता-कांपा,टूटा,बिछड़ा,गिरा,उड़ चला कहीं डाल से दूर, बोला-नियति में साथ अपना इतना ही,मैं हूँ अब मजबूर, जा रहा हूँ वहां,जहाँ मुझे खुद भी नह...
Thursday, February 14, 2013

तू और मैं

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तू और मैं, क्या हैंऔर कौन हैं ? कब से हैं ? कब तक हैं ? प्रश्न से उत्तर तक या, उत्तर के प्रश्न तक ? आसमान से धरती,और , धरती के कण-...
Friday, February 8, 2013

इंतज़ार और सपने

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                माँ! इंतज़ार ही, तुम्हारी किस्मत क्यों है ? कभी पापा का इंतज़ार, कभी स्कूल से हमारे लौटने का इंतज़ार, क्यों मेरी एक झलक ...
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Tuesday, February 5, 2013

रंग भरे सपने

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मित्रों मेरी यह रचना " रंग भरे सपने " समाचार पत्र " अमर उजाला " की " रूपायन "में आज प्रकाशित हुई है, आप भी ...
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Friday, July 27, 2012

वर्तमान में

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                                                                     जो बीत गया सो वो जाने दो , जो आ रहा वो स्वीकार करो , ये वर्तमान ज...
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Thursday, June 14, 2012

झंझावात

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                                                       अपने उलझे मन की गुत्थी सुलझाओ, अब बस तुम इन पीड़ाओं से पार पाओ, देखो तो सब कुछ नही...
Wednesday, April 25, 2012

बंदिश

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                                                                 विवाह-  जन्मों का बंधन,पर उसके कैसे हैं ये ढंग? जीना था मुझको भी अप...
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Tuesday, April 17, 2012

आस

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                                                                       संकल्प लिया तो, जलने दो मशाल, मशाल से मशाल को जगाने दो, मनो...
Monday, April 16, 2012

जीवन सत्य

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                                                                            पतझर नहीं तो बोल रे मानुस, बसंत का है क्या मोल ? फिर जीवन ठ...
Sunday, April 15, 2012

सन्देश

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मित्रों ! मेरी यह रचना मासिक पत्र " मृगपाल " ( सितम्बर 1995 अंक ) जो कि झाँसी से प्रकाशित है में प्रकाशित हुई है , आप भी इस रचना...
Saturday, April 14, 2012

बसंत ख़ुमार

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                                                                   हवा में खुशबुएँ हैं, बसंत की आहट है, फूलों पर रंग बिखरे, भवरों की च...
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Friday, April 13, 2012

पावन जल धार

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                                                               स्वच्छ, धवल,कंचन नील अंचल सी, कल-कल,छल-छल नित हलचल सी, इक नदी बह रही...
Wednesday, April 11, 2012

प्रिय की बतियाँ

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मित्रों ! मेरी यह रचना मासिक पत्र " मृगपाल " सितम्बर 1995 अंक में जो कि झाँसी से प्रकाशित है में प्रकाशित हुई।  आप भी इस रचना को...
Tuesday, April 10, 2012

चार पहर

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                                                                        सुबह के सूरज ने, किरणों की बाहें फैलाईं, और कहा- उठ  नए दिन, न...
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Sunday, April 8, 2012

सहजता

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                                                                          इस अहम् की उलझी सी गांठें तो खोलो, आखिर अब तुम दो बोल तो मीठे ब...
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Saturday, April 7, 2012

कर्तव्यबोध

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तुम विराट सत्ता के स्वामी, मैं जल की क्षीण रेख सा हूँ, तुम शिला सरीखे आ जाओ, मुझको तो राह बनानी है। आज कैद मुठ्ठी का अंकुर हूँ, तुम ...
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Friday, April 6, 2012

क्षणिकाएँ

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                                                                                                                                धर्म   ...
Thursday, April 5, 2012

प्रेम रहस्य

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                                                                  तुम संग ओ सांवरे, नयन मिले बावरे,   झुके उठे , उठे झुके, लजाते स...
Wednesday, April 4, 2012

चुनौती

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मित्रों ! मेरी यह रचना पूर्वोत्तर रेलवे की पत्रिका " रेल - रश्मि "में अप्रैल 1987 में प्रकाशित हुई , उस समय पूर्वोत्तर रेलवे के म...
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Tuesday, April 3, 2012

बचपन

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बचपन   जिससे कि चिंताएं डरती हैं, मुस्कानें जिसपर मरती हैं, सभी जिसको अपने प्यारे, सुख सपने हैं जिसके न्यारे, हठ के आगे दुनिया झुकत...
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