ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Friday, November 29, 2019

चाहत हो जाती हूँ

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सप्तरंगी इंद्रधनुष, खुश्बुएं हजार किस्म, भिन्न रूप-आकार लिए, खिलती हूँ,खिलखिलाती हूँ, प्रकृति के फूलों की महक सी, मनमोहक बनके दिलों म...
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Friday, November 8, 2019

बहुत कुछ अनकही

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मित्रों !मेरी इस कविता कि कुछ पंक्तियाँ समाचार पत्र " दैनिक जागरण " में छप चुकी हैं , आप लोग भी इसे पढ़ें। रात बड़ी खामोश थी पर...
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Tuesday, September 17, 2019

कुछ-कुछ जाना है

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कलियाँ कब,क्यों चुपके से,फूल बनके महकें ? ये भँवरे गुन-गुन सुन ज़रा,क्या कुछ हैं कहते ? तितलियाँ भी क्यों रंग जादुई,परों में हैं भरतीं ?...
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Monday, September 2, 2019

ज़िन्दगी में ढली मैं

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माँ की कोख में रची मैं,ज़िन्दगी में ढली मैं , पिता की बाहों के पालने में,खेली-पली मैं , आँगन की चिरैया सी,चहक-चहक डोली , मीठी सी मुस्कान ...
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Monday, August 26, 2019

तुम्हारे जाने के बाद

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तुम क्या जानो के ऐसे,तुम्हारे जाने के बाद , कैसा बेबस सा हुआ,ये मेरा मन,ये मेरा तन , के देहरी पर निगाह,ठहर सी जाती है मेरी , जहाँ पे कि ...
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Monday, August 5, 2019

ये क्यों है ?

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ये अपनों के ही दरमियान,खड़ी दीवार क्यों है ? के आज आदमी ही,आदमी का शिकार क्यों है ? मशीनी से जिस्म हुए,भावों के समंदर रीत गए , ये भाई-भा...
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Saturday, July 27, 2019

ऐसे कितने ही जाधव

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न जाने कितने जाधव,कितनी विदेशी जेलों में फंसे हैं, आँखों में झाइयाँ,शरीर है ढांचा,पर बेड़ियों में कसे हैं। ये गालियों और लातों की रोटी स...
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Monday, July 1, 2019

कहाँ से लाओगे ?

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यूँ चाहतों का जाल,भेद कर,तुम कहाँ जाओगे ? जो गर चाहोगे भूलना तो भी,भुला नहीं पाओगे , के हमारा हंसना,रूठना,उलझना,मान-मनुहार , बंध गए हो ज...
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Wednesday, May 29, 2019

बनाते नहीं हैं

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सच्चाई,सुकून,भरोसा,ये जीवन की खुश्बुएं हैं, किसी से गर जो मिले,तो उसे भुलाते नहीं हैं, ख्वाबों में जो खोया निश्छल,मुस्कुरा रहा हो, ऐसी ...
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Monday, April 29, 2019

चिट्ठी तेरे नाम लिखी

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सुन रे प्रिय! मैंने इक चिट्ठी,तेरे नाम लिखी, इक दिन सूना,और अधूरी इक रात लिखी, के जिसमें है व्यथा,कुछ कही,अनकही सी,  कुछ तो है सहनीय,और ...
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Friday, March 15, 2019

सुंदर ख्वाब

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अगर प्यार जो हुआ है तो,हो भी जाने दो, ये दिल जो खिला है तो,खिल भी जाने दो, ये इक तिलस्मयी,दुनिया का आगाज़ है, चाहत को मीठे सपनों में,खो ...
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Monday, March 4, 2019

ये अजीब भटकाव

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रोज सूरज का आना,और दिन का चढ़ना , वही किरणों का धरती पे,धीरे-धीरे बढ़ना , वही सड़कों पे दौड़ते हुए,लोग इधर-उधर , भरते हुए स्कूल-दफ्तर,खाली स...
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Thursday, February 14, 2019

ओ बसंत फिर आए तुम

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अरे ओ बसंत! फिर से आए तुम , इक अजब हलचल सी लाए तुम , तुमने रंग बिखेरे पहले धरती पर , और फिर खुद पे ही इतराए तुम। रंग भरी सी श...
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Monday, February 4, 2019

अच्छा ही होगा

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अच्छा हुआ के जो,तुमने बात बोल दी, के मन की दुखन,मेरे प्याले में घोल दी, यूँ कहने को मैं,तुम्हारा अपना भी नहीं, पर अपना जानके,तमाम गांठे ...
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Wednesday, January 16, 2019

बताऊँ कैसे ?

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कैसे समझाऊं उन्हें यूँ रूठ के जाया नहीं करते , दिल नाज़ुक है,बार-बार यूँ सताया नहीं करते , जो उदास हो चल दिए हम,तो इल्म रहे उनको , लाख च...
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Tuesday, January 1, 2019

नमन आपको

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पुष्प खिलें खुशियों के,जीवन में, उल्लसित विचार हों,अंतर्मन में , अभिनंदन हो इस,नव संघर्ष का, है ये नमन आपको,नव वर्ष का।  राह हो...
Thursday, October 4, 2018

आप चुप क्यूँ हैं ?

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मित्रों मेरी यह रचना "दिल्ली प्रेस प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका सरिता अप्रैल-प्रथम 2019" में प्रकाशित हुई है आप भी इसे पढ़ें।...
Tuesday, June 5, 2018

फरेब कैसे हैं

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वो जानते है सब कुछ,पर खुद पे गुमान किये बैठे हैं , दिलों के व्यापार खेलते हैं,और अनजान बने बैठे हैं , मेरे सब्र की इन्तहां भी,कोई कम नह...
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Saturday, March 24, 2018

ढल रहे हैं

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आप पहली मुलाक़ात से ही,मेरे अपने से बन रहे हैं, सुनहरे ख़्वाब मेरे,शब्द बनके कविता में ढल रहे हैं, मेरे ख्यालों के शब्द,प्रश्न बनके मुझसे ह...
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Friday, February 2, 2018

हम करें तो गुस्ताखी

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 मित्रों मेरी यह रचना "हम करें तो गुस्ताखी "सरिता जनवरी (द्वितीय) 2018 में प्रकाशित हुई है। यह आपके सम्मुख भी प्रस्तुत है।  आ...
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Wednesday, August 23, 2017

ऐ वक्त

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ऐ वक्त तेरा आना और फिर,चुपके से गुज़र जाना, आना हमसफ़र बनके और,चोरों सा निकल जाना, ये वक्त,मेरा वक्त है कह,मैंने ही तुझे अपना माना, पर ओ ...
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Thursday, June 8, 2017

वही वादे वही कसमें

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जन्म लेने के साथ ही जन्मी, मेरी पहचान इस दुनिया में, अजब विस्मित करें ये बातें, जीवन मेरा ख्वाहिशें उनकी, तमाम उम्मीदों के संग पालें, ...
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Monday, May 1, 2017

अनजानी,अनदेखी कल्पना

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स्वर्ग की कामना समाई है,हर किसी के मन में, और दुखों से पार,पाना चाहते हैं,अपने जीवन के, धाम दर्शन करके प्रभु के,द्वार जाने की चाह है, स...
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Wednesday, April 19, 2017

आज तो प्रिय मेरा रूठने का मन है

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आज सुनो!प्रिय तुमसे,मेरा रूठने का मन है, बस अपना वज़ूद ढूंढना है,नहीं कोई गम है, तुम्हारा प्यार यूँही,नापने का मन हो चला है, तुम भूले ध्य...
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Monday, April 3, 2017

मुफ्त नहीं मुहब्बत मेरी

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मुफ्त नहीं मुहब्बत मेरी,तुम्हें झुकना होगा, तुम सिर्फ मेरे हो,ये वादा तुम्हें करना होगा, धोखा नहीं चलेगा,प्यार के इस व्यापार में, खुल के...
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Saturday, March 18, 2017

तुम ही बताओ

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ये निगाहें इक अजीब सा ही गुनाह किये जाती हैं, इधर-उधर भटकती सी तुम पे ही ठहर जाती हैं। ये ज़ुबाँ है कि लफ़्ज़ों संग खेलना शौ...
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Friday, March 3, 2017

होली के मतवाले रंग

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इस प्रकृति के सात रंग से जन्मे कई हज़ार हैं रंग, ख़ुशी जताते चटकीले रंग,फीके हैं दुखियारे रंग, इस जीवन की उठापटक के टेंशन वाले न्यारे रं...
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Wednesday, February 1, 2017

मन बसंत

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पीले-पीले फूल खिले,सरसों से भरे हैं खेत झुके, प्रकृति की ये छटा देख,कदम भी हैं रुके-रुके, गेंदा हज़ारा की खिली,पंखुड़ियों की पीत छटा, पी...
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Friday, January 27, 2017

खेल राजनीति का खेलें

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आओ हम मिलकरके खेल,राजनीति-राजनीति का खेलें, देश को रखें एक तरफ और फिर सम्पूर्ण स्वार्थ में जी लें। भिन्न-भिन्न पार्टियाँ बनाकर,चिन्ह अपन...
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Wednesday, January 18, 2017

हमारे बाँकुरे जवान

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जिनसे अपनी है सुबह शाम,वो हैं सीमाओं पर खड़े हुए, वो प्रहरी वो सीमा रक्षक,वो जवान सीमाओं पर डटे हुए। उनके होने से हम बेफिक्र,उनसे सुरक्षित...
Friday, December 9, 2016

ओ सृष्टि जननी

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ओ पावन जीव जननी जलधार,महिमा तेरी अपरम्पार, तेरे कारण ही,इस धरती पे फैला,इस सृष्टि का संचार, तेरे वज़ूद के कारण ही,यह पृथ्वी,है नीला ग्रह ...
Monday, October 24, 2016

"शुभ दीपावली"मनाएं

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चलो दीप पर्व को,इस वर्ष,कुछ अलबेला सा मनाएं, बुराइयों को बुहार के,आँगन में,खुशियों को ले आएं, नवल वसन हों,भाव शुभता संग,आपसी प्रेम जगाए,...
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Friday, October 7, 2016

कांटे की व्यथा

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इक रोज़ पार्क में,बैठा था मैं,इक क्यारी के पास, तभी आवाज़ आई,कुछ अपरिचित सी,कुछ ख़ास, फिर चहुँ ओर मैंने,नज़र दौड़ाई,पर दिखा न कोई, सोचा कि ...
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Thursday, September 29, 2016

साथ तुम्हारा

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साथ तुम्हारा पा के,ये जीवन,यूं खिल सा गया है, जैसे ठहरी तंद्राओं को,इक वज़ूद सा,मिल गया है। तुम्हारे इन हाथों में,जब भी कभी,मेरा हा...
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Friday, September 23, 2016

जल ही जीवन

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जल के बिन किसी दशा में जीवन संभव नहीं हमारा, जल संरक्षण ही अब रह गया जीवन का मात्र सहारा, अन्धाधुन्ध जल दोहन से भविष्य बन रहा अंधियारा, ...
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Tuesday, September 20, 2016

ज़िन्दगी क्या है ?

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ज़िन्दगी क्या है ? क्या ज़िन्दगी सवाल है ? शायद ये सवाल है------ मुझे किसने है भेजा?कहाँ से हूँ मैं आया ? क्या उद्देश्य है मेरा?ये जन्म ...
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तुम आ जाओ

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तुम आ जाओ कि देखो - सांझ भी तो अब थकी-थकी सी हो चली है , गगन में पंछियों की कतारें लग रही भली हैं, आपस में कह रहे दिनभर के शिक़वे गिले ह...
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Monday, August 3, 2015

जरा कह दो

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जरा इन राहों से कह दो,कि पलकें बिछाएं, हवाओं से कह दो,दिलकश गीत गुनगुनाएं, मोहक सुरलहरी से,दिलों में हलचल मचाके, बहके जज़्बात के संग,आसमा...
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