ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Friday, January 27, 2017

खेल राजनीति का खेलें

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आओ हम मिलकरके खेल,राजनीति-राजनीति का खेलें, देश को रखें एक तरफ और फिर सम्पूर्ण स्वार्थ में जी लें। भिन्न-भिन्न पार्टियाँ बनाकर,चिन्ह अपन...
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Wednesday, January 18, 2017

हमारे बाँकुरे जवान

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जिनसे अपनी है सुबह शाम,वो हैं सीमाओं पर खड़े हुए, वो प्रहरी वो सीमा रक्षक,वो जवान सीमाओं पर डटे हुए। उनके होने से हम बेफिक्र,उनसे सुरक्षित...
Friday, December 9, 2016

ओ सृष्टि जननी

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ओ पावन जीव जननी जलधार,महिमा तेरी अपरम्पार, तेरे कारण ही,इस धरती पे फैला,इस सृष्टि का संचार, तेरे वज़ूद के कारण ही,यह पृथ्वी,है नीला ग्रह ...
Monday, October 24, 2016

"शुभ दीपावली"मनाएं

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चलो दीप पर्व को,इस वर्ष,कुछ अलबेला सा मनाएं, बुराइयों को बुहार के,आँगन में,खुशियों को ले आएं, नवल वसन हों,भाव शुभता संग,आपसी प्रेम जगाए,...
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Friday, October 7, 2016

कांटे की व्यथा

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इक रोज़ पार्क में,बैठा था मैं,इक क्यारी के पास, तभी आवाज़ आई,कुछ अपरिचित सी,कुछ ख़ास, फिर चहुँ ओर मैंने,नज़र दौड़ाई,पर दिखा न कोई, सोचा कि ...
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Thursday, September 29, 2016

साथ तुम्हारा

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साथ तुम्हारा पा के,ये जीवन,यूं खिल सा गया है, जैसे ठहरी तंद्राओं को,इक वज़ूद सा,मिल गया है। तुम्हारे इन हाथों में,जब भी कभी,मेरा हा...
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Friday, September 23, 2016

जल ही जीवन

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जल के बिन किसी दशा में जीवन संभव नहीं हमारा, जल संरक्षण ही अब रह गया जीवन का मात्र सहारा, अन्धाधुन्ध जल दोहन से भविष्य बन रहा अंधियारा, ...
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Tuesday, September 20, 2016

ज़िन्दगी क्या है ?

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ज़िन्दगी क्या है ? क्या ज़िन्दगी सवाल है ? शायद ये सवाल है------ मुझे किसने है भेजा?कहाँ से हूँ मैं आया ? क्या उद्देश्य है मेरा?ये जन्म ...
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तुम आ जाओ

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तुम आ जाओ कि देखो - सांझ भी तो अब थकी-थकी सी हो चली है , गगन में पंछियों की कतारें लग रही भली हैं, आपस में कह रहे दिनभर के शिक़वे गिले ह...
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Monday, August 3, 2015

जरा कह दो

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जरा इन राहों से कह दो,कि पलकें बिछाएं, हवाओं से कह दो,दिलकश गीत गुनगुनाएं, मोहक सुरलहरी से,दिलों में हलचल मचाके, बहके जज़्बात के संग,आसमा...
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Saturday, June 27, 2015

चोरनी हो तुम !

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होंठों की लाली और,ये कपोलों की आभा गुलाबी, फूलों की रंगीन सुर्खियां चुरा के रूप में सजाया है।  छलिया भवरों की लेके चटक काली सी कालिमा, ...
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Saturday, May 30, 2015

अब दादी नहीं है

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बचपन की बातें , मीठे से सपनों भरी रातें , गर्मी की छुट्टियाँ और गाँव को जाना , दादी के गलबहियाँ डाल लाड़ लड़ाना , वो आम के बगीचे में , ...
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Wednesday, May 13, 2015

काश कि

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काश कि इस रात की चादर नीचे झुक जाए, इतना कि मेरे इन दोनों हाथों से वो टकराए, तोड़-तोड़ तारों को अपनी चूनर में टांक लूंगी, चाँद को खींच ...
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Wednesday, May 6, 2015

क्यों पूछते हैं?

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हाथों में हाथ थाम,साथ-साथ तय की लम्बी दूरियाँ, हर मोड़ पे कसमें-वादे भी,निगाहों ने किये हैं बयाँ, आपकी मंजिल की राहें,जब बन गयीं मंजिल मेर...
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Wednesday, April 8, 2015

ओ प्रिये मेरी !

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ओ प्रिये मेरी ! संगिनी मेरी ! ओ मेरे सपनों की रानी, तुम बनी हो जब से मेरे इस जीवन की अमिट कहानी, मैंने पाकर तुम्हें अपने साथ में धन्य खु...
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Tuesday, March 17, 2015

अस्तित्व कहाँ ?

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बिन पुष्पों के है मधुबन कैसा, बिना अश्क के कोई नेत्र कहाँ ? बिन रंगों के उत्सव भला कैसा, बिना कहकहे उल्लास कहाँ ? बिन पित...
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Thursday, February 19, 2015

झूठ न बोलो

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मित्रों! मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित " सरिता " मार्च 2015 में प्रकाशित हुई है,आप भी इसे पढ़ें। मित्रो...
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Monday, February 2, 2015

कुछ तो कहा है

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कलियाँ अंगड़ाई भर-भर के मोहक रूप रख रहीं , फूलों की रंगीन सी छटा जैसे हर दृष्टि परख रही , खुशबू मनभावन सी भीनी-भीनी सी है बिखर रही , आखिर...
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Tuesday, January 13, 2015

तुम सुन रहे हो न?

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ये पवन की सरसराहट,ये अजब जीवन की गुनगुनाहट , जगत-निर्माण से अब तक की ये रहस्यमयी सी आहट , सब जीवों में रह रही है,ये मुझमें तुममें भी तो ब...
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Tuesday, December 9, 2014

सब तिलिस्मयी

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फूलों के रंगों की छटा कुछ हो चली है सुरमई, वो भी दिल खोल के खिले जो थे पुष्प छुई-मुई, कलियों की मुस्कुराहटें हो चलीं हैं रहस्यमयी, भंवरो...
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Friday, November 28, 2014

शुक्रगुज़ार हूँ तुम्हारा !

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आज तेरी यादों ने मन की राहों को ऐसे मोड़ा है , कि भरे जग में मुझे यूॅ वीरानियों में लाके छोड़ा है , घेरे हुए हैं मुझे चहुंओर से तेरे तमा...
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Thursday, November 13, 2014

ज़माना हमारा-तुम्हारा

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वो पर्दों के अंदर चुपके-छुपके झांकती निगाहें, लाज भरी खिलखिलाहटें औरसिमटी सी बाहें, कहीं पे खो सा गया है शर्मिंदगी का वो उजाला, आधुनिकत...
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Wednesday, October 29, 2014

मैंने कब कहा ?

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मैंने कब कहा प्रिय कि मुझे तुमसे बेहद प्यार है ? हर पल,हर घड़ी बस सिर्फ तुम्हारा ही इंतज़ार है, वो तो निगाहें हैं जो कि उठ जाती हैं हर आहट ...
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Wednesday, October 15, 2014

भविष्य नया ढूंढूंगी

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लो मैंने तोड़ दिए अब,सब तुम्हारे ये बंधन , तुम्हारे दोषारोपण और तुमसे ये अनबन , अब और नहीं जागूंगी मैं और नहीं रोऊंगी, काल की किताब के मै...
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Thursday, September 25, 2014

आप कहें तो

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मित्रों मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित गृहशोभा में प्रकाशित हुई है,आप भी इसे पढ़ें। आप कहें तो आपको इस दिल की गहर...
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Thursday, September 11, 2014

जानम मैं हूँ न !

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अपना बनाने की कला,जो तुमने है सीखी, एम.बी.ए. की डिग्री भी,फेल मैंने है देखी, आँखों के फंदे में ऐसा,तुमने मुझे फंसाया, हाय ! ख़ुदा भी मेर...
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Thursday, September 4, 2014

बहका गई

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बादल जो बेख़ौफ़ उमड़े हैं,कैसे घनघोर घुमड़े हैं, प्रकृति के वाद्य पर देखो,सुरीले गीत कई उमड़े हैं, हलकी ठंडी-ठंडी बयार,और देखो बूँद-बूँद फुहार...
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Thursday, August 28, 2014

सदा बनी रहे

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सूरज की लाली,पृथ्वी की हरियाली, सागर का धैर्य,नदियों की लहरें मतवाली, पंछियों का कलरव,भँवरों के गुनगुन का हौसला, पुष्पों की रंगत और मनभा...
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Tuesday, August 19, 2014

तो जी ही लूंगा

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मुख फेर रहे हो क्यों मुझसे,जा रहे हो क्यूँ हाथ-साथ छोड़ कर ?         सच है!जी नहीं पाओगे तुम भी इस तरह,राह अपनी मोड़ कर। क्यों समेटे लिए ...
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Wednesday, August 13, 2014

मैं हूँ युग युवा

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                          मैं हूँ युग युवा,नित नयी लगन लगा,नव राहों पे बढ़ता जा हूँ, शिक्षा की सीढ़ी,हौसलों के साथ,हर ऊँचाइयाँ चढ़ता जा  हूँ। ...
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Wednesday, August 6, 2014

हे सुस्वादु टमाटर !

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टमाटर का भाव 140 रुपए किलो होने पर !  हे सुस्वादु टमाटर ! आओ जी !  मेरी झोली में भी आ जाओ जी ! दुकानों पर बैठ के इतराते हो, क्यूँ दा...
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Wednesday, July 30, 2014

किस लिए है ?

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ये झरनों की झर-झर,कुछ-कुछ कहती सी क्यूँ है? ये सब नदियां भी कल-कल मचलतीं सी क्यूँ हैं? यूँ बीहड़ सी राहों और रोड़ों संग टकराते-बलखाते, क्...
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Monday, July 21, 2014

मैं चाहती हूँ

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मैं अपने लिए भी ये जहान चाहती हूँ, इस खुले आसमान में उड़ान चाहती हूँ, जन्मी तो माँ से इक बेटे के सदृश्य ही, पर हक़ और ख़ुशी का सैलाब चाहत...
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Monday, July 7, 2014

अंग दान,स्वयं दान,महा दान

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हर सुबह की साँझ है और हर रात का है सवेरा, ये जो जन्म पाया है हमने,चाहे मेरा हो या तेरा, आना भी रुलाई संग,और जाना भी रुलाई संग, इसी बीच भर...
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Thursday, June 26, 2014

देखा जाएगा आखिर

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आज उड़ चला दिल मेरा,न जाने किस ओर किस डगर, मंजिल मिलेगी या नहीं,इक सवाल है पर फिर भी मगर, चल दिया जो अनजानी राह पर,तो फिर लौटना कैसा ? मं...
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Wednesday, June 18, 2014

सर्वस्व समर्पण

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हारता सा यह मन,प्रिय आज मेरा , बन रही हूँ आज मैं कण्ठ-हार तेरा । भावातुर इस हृदय की भाव-सरिता , ऋतुओं की बनकर मैं आज कविता । मुक्ति...
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Thursday, June 12, 2014

दोस्त - दोस्ती

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दोस्त वो जो दोस्ती की हर रस्म निभा ले, साथ दे सदा,दिल से अटूट बंधन बना ले, आपकी उन्नति से जिसे खुशी मिले अपार, आपकी खुशियों को जो अंतर्म...
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