ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Monday, August 3, 2015

जरा कह दो

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जरा इन राहों से कह दो,कि पलकें बिछाएं, हवाओं से कह दो,दिलकश गीत गुनगुनाएं, मोहक सुरलहरी से,दिलों में हलचल मचाके, बहके जज़्बात के संग,आसमा...
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Saturday, June 27, 2015

चोरनी हो तुम !

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होंठों की लाली और,ये कपोलों की आभा गुलाबी, फूलों की रंगीन सुर्खियां चुरा के रूप में सजाया है।  छलिया भवरों की लेके चटक काली सी कालिमा, ...
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Saturday, May 30, 2015

अब दादी नहीं है

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बचपन की बातें , मीठे से सपनों भरी रातें , गर्मी की छुट्टियाँ और गाँव को जाना , दादी के गलबहियाँ डाल लाड़ लड़ाना , वो आम के बगीचे में , ...
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Wednesday, May 13, 2015

काश कि

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काश कि इस रात की चादर नीचे झुक जाए, इतना कि मेरे इन दोनों हाथों से वो टकराए, तोड़-तोड़ तारों को अपनी चूनर में टांक लूंगी, चाँद को खींच ...
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Wednesday, May 6, 2015

क्यों पूछते हैं?

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हाथों में हाथ थाम,साथ-साथ तय की लम्बी दूरियाँ, हर मोड़ पे कसमें-वादे भी,निगाहों ने किये हैं बयाँ, आपकी मंजिल की राहें,जब बन गयीं मंजिल मेर...
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Wednesday, April 8, 2015

ओ प्रिये मेरी !

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ओ प्रिये मेरी ! संगिनी मेरी ! ओ मेरे सपनों की रानी, तुम बनी हो जब से मेरे इस जीवन की अमिट कहानी, मैंने पाकर तुम्हें अपने साथ में धन्य खु...
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Tuesday, March 17, 2015

अस्तित्व कहाँ ?

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बिन पुष्पों के है मधुबन कैसा, बिना अश्क के कोई नेत्र कहाँ ? बिन रंगों के उत्सव भला कैसा, बिना कहकहे उल्लास कहाँ ? बिन पित...
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Thursday, February 19, 2015

झूठ न बोलो

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मित्रों! मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित " सरिता " मार्च 2015 में प्रकाशित हुई है,आप भी इसे पढ़ें। मित्रो...
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Monday, February 2, 2015

कुछ तो कहा है

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कलियाँ अंगड़ाई भर-भर के मोहक रूप रख रहीं , फूलों की रंगीन सी छटा जैसे हर दृष्टि परख रही , खुशबू मनभावन सी भीनी-भीनी सी है बिखर रही , आखिर...
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Tuesday, January 13, 2015

तुम सुन रहे हो न?

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ये पवन की सरसराहट,ये अजब जीवन की गुनगुनाहट , जगत-निर्माण से अब तक की ये रहस्यमयी सी आहट , सब जीवों में रह रही है,ये मुझमें तुममें भी तो ब...
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Tuesday, December 9, 2014

सब तिलिस्मयी

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फूलों के रंगों की छटा कुछ हो चली है सुरमई, वो भी दिल खोल के खिले जो थे पुष्प छुई-मुई, कलियों की मुस्कुराहटें हो चलीं हैं रहस्यमयी, भंवरो...
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Friday, November 28, 2014

शुक्रगुज़ार हूँ तुम्हारा !

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आज तेरी यादों ने मन की राहों को ऐसे मोड़ा है , कि भरे जग में मुझे यूॅ वीरानियों में लाके छोड़ा है , घेरे हुए हैं मुझे चहुंओर से तेरे तमा...
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Thursday, November 13, 2014

ज़माना हमारा-तुम्हारा

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वो पर्दों के अंदर चुपके-छुपके झांकती निगाहें, लाज भरी खिलखिलाहटें औरसिमटी सी बाहें, कहीं पे खो सा गया है शर्मिंदगी का वो उजाला, आधुनिकत...
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Wednesday, October 29, 2014

मैंने कब कहा ?

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मैंने कब कहा प्रिय कि मुझे तुमसे बेहद प्यार है ? हर पल,हर घड़ी बस सिर्फ तुम्हारा ही इंतज़ार है, वो तो निगाहें हैं जो कि उठ जाती हैं हर आहट ...
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Wednesday, October 15, 2014

भविष्य नया ढूंढूंगी

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लो मैंने तोड़ दिए अब,सब तुम्हारे ये बंधन , तुम्हारे दोषारोपण और तुमसे ये अनबन , अब और नहीं जागूंगी मैं और नहीं रोऊंगी, काल की किताब के मै...
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Thursday, September 25, 2014

आप कहें तो

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मित्रों मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित गृहशोभा में प्रकाशित हुई है,आप भी इसे पढ़ें। आप कहें तो आपको इस दिल की गहर...
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Thursday, September 11, 2014

जानम मैं हूँ न !

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अपना बनाने की कला,जो तुमने है सीखी, एम.बी.ए. की डिग्री भी,फेल मैंने है देखी, आँखों के फंदे में ऐसा,तुमने मुझे फंसाया, हाय ! ख़ुदा भी मेर...
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Thursday, September 4, 2014

बहका गई

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बादल जो बेख़ौफ़ उमड़े हैं,कैसे घनघोर घुमड़े हैं, प्रकृति के वाद्य पर देखो,सुरीले गीत कई उमड़े हैं, हलकी ठंडी-ठंडी बयार,और देखो बूँद-बूँद फुहार...
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Thursday, August 28, 2014

सदा बनी रहे

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सूरज की लाली,पृथ्वी की हरियाली, सागर का धैर्य,नदियों की लहरें मतवाली, पंछियों का कलरव,भँवरों के गुनगुन का हौसला, पुष्पों की रंगत और मनभा...
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Tuesday, August 19, 2014

तो जी ही लूंगा

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मुख फेर रहे हो क्यों मुझसे,जा रहे हो क्यूँ हाथ-साथ छोड़ कर ?         सच है!जी नहीं पाओगे तुम भी इस तरह,राह अपनी मोड़ कर। क्यों समेटे लिए ...
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Wednesday, August 13, 2014

मैं हूँ युग युवा

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                          मैं हूँ युग युवा,नित नयी लगन लगा,नव राहों पे बढ़ता जा हूँ, शिक्षा की सीढ़ी,हौसलों के साथ,हर ऊँचाइयाँ चढ़ता जा  हूँ। ...
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Wednesday, August 6, 2014

हे सुस्वादु टमाटर !

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टमाटर का भाव 140 रुपए किलो होने पर !  हे सुस्वादु टमाटर ! आओ जी !  मेरी झोली में भी आ जाओ जी ! दुकानों पर बैठ के इतराते हो, क्यूँ दा...
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Wednesday, July 30, 2014

किस लिए है ?

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ये झरनों की झर-झर,कुछ-कुछ कहती सी क्यूँ है? ये सब नदियां भी कल-कल मचलतीं सी क्यूँ हैं? यूँ बीहड़ सी राहों और रोड़ों संग टकराते-बलखाते, क्...
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Monday, July 21, 2014

मैं चाहती हूँ

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मैं अपने लिए भी ये जहान चाहती हूँ, इस खुले आसमान में उड़ान चाहती हूँ, जन्मी तो माँ से इक बेटे के सदृश्य ही, पर हक़ और ख़ुशी का सैलाब चाहत...
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Monday, July 7, 2014

अंग दान,स्वयं दान,महा दान

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हर सुबह की साँझ है और हर रात का है सवेरा, ये जो जन्म पाया है हमने,चाहे मेरा हो या तेरा, आना भी रुलाई संग,और जाना भी रुलाई संग, इसी बीच भर...
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Thursday, June 26, 2014

देखा जाएगा आखिर

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आज उड़ चला दिल मेरा,न जाने किस ओर किस डगर, मंजिल मिलेगी या नहीं,इक सवाल है पर फिर भी मगर, चल दिया जो अनजानी राह पर,तो फिर लौटना कैसा ? मं...
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Wednesday, June 18, 2014

सर्वस्व समर्पण

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हारता सा यह मन,प्रिय आज मेरा , बन रही हूँ आज मैं कण्ठ-हार तेरा । भावातुर इस हृदय की भाव-सरिता , ऋतुओं की बनकर मैं आज कविता । मुक्ति...
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Thursday, June 12, 2014

दोस्त - दोस्ती

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दोस्त वो जो दोस्ती की हर रस्म निभा ले, साथ दे सदा,दिल से अटूट बंधन बना ले, आपकी उन्नति से जिसे खुशी मिले अपार, आपकी खुशियों को जो अंतर्म...
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Friday, June 6, 2014

सब याद है मुझे

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मित्रों मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका " गृहशोभा " में प्रकाशित हुई है ,आप भी इसे पढ़ें। कुछ-क...
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Monday, May 26, 2014

क्या इसी तरह से

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सामाजिक रस्मों के साथ अपना बना कर, बाबुल के आँगन से अपने आँगन में लाकर, उसकी पलकों के ख़्वाबों में रंग बसा कर,  संग साँसों का रिश्ता जोड़ ...
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Monday, May 19, 2014

प्रेम और जीवन

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प्यार अनूठा एहसास है,बड़ा ही प्यारा,बहुत ही सुंदर , यह रहता हर किसी की,दिल की गहराइयों के अंदर । धर्म-जात की ऊंची-ऊंची दीवारें,न साध सकीं...
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Saturday, May 10, 2014

पेंटिंग

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मित्रों मेरे द्वारा बनाई गई यह पेंटिंग आज के समाचार पत्र NBT नवभारत टाइम्स ( दिनॉंक -10 /5 /2014 )के नई दिल्ली /लखनऊ संस्करण में पेज ...
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Tuesday, April 29, 2014

चलो माफ़ किया

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जानते हो तुम ? कि जिस दिन तुम छोड़ गए थे, मेरे प्यारे सुनहरे से स्वप्न,मुझसे ही रूठ गए थे, कहाँ-कहाँ नहीं ढूँढा मैंने तुम्हें,सब ओर यहाँ-व...
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Wednesday, April 23, 2014

लकीर और वज़ूद

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वक्त के साथ - संसार में तो - चला आया मैं, क्यों आया ?किस लिए आया ? सवाल - जवाबों के साथ,और, समाज की खींची लकीरों के साथ, सामंजस्य बिठ...
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Thursday, April 10, 2014

बंधु ! सब समान हैं

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ये चेहरे अलग-अलग से हैंं दिखते, पर अपने तो इनमें कोई न लगते, ये मोदी,राहुल,माया,केजरीवाल हैं, ये पार्टियां वादों की घालमघाल हैं, वो बो...
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Tuesday, March 11, 2014

बदल रहे हैं हम

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अब आज देखिये कुछ-कुछ तो बदल रहे हैं हम, वक्त के तकाज़े पे कुछ-कुछ सम्हल रहे हैं हम, कुदरत से की जो छेड़-छाड़ तो अच्छा नहीं होगा, माता-पिता ...
Thursday, March 6, 2014

बस रखो विश्वाश

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बसे-बसाए घर क्यूँ बन रहे बंजर, बिखरते हुए लोग,बुझी हुई सी सहर, धीरज तो धर बहेगी,शान्ति की लहर, थम ही जाएगा ये,आखिर तूफ़ान ही तो है। झु...
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Monday, March 3, 2014

अब आ जाओ

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तुम आओ कि तुम बिन , मेरे सभी गाँव वीराने हैं। सूनी हो गईं गलियां सारी , अँखियाँ सूने पनघट सी हैं , सूनी गगरी सा मन मेरा , मन भाव सभी...
Monday, February 17, 2014

चाँद का धरा प्रेम

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आज चाँद देखो तो,कुछ धुंधला हो चला है, न जाने किन ख्यालों में,वो गुम हो चला है, अनेक तारों स्वरुप उलझे,ख्यालों के संग, टिम-टिम चमकते भाव,...
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Tuesday, February 11, 2014

कैसी ये रीत

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दिल मेरा और राज़ आपका,कैसी ये रीत है , मेरी ही हार इसमें,और आपकी ही जीत है , मन के तारों का जुड़ना,इक मीठा संगीत है , ये जीवन कि मधुरता,ये...
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Thursday, February 6, 2014

कब तक

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एक और नया दिन, मैं बैठी हूँ लाइब्रेरी में आज मेरी बारी है- लाइब्रेरी सम्हालने की, काश ! सोचने की भी कोई बारी होती कोई सीमा होती, द...
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