ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Thursday, August 28, 2014

सदा बनी रहे

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सूरज की लाली,पृथ्वी की हरियाली, सागर का धैर्य,नदियों की लहरें मतवाली, पंछियों का कलरव,भँवरों के गुनगुन का हौसला, पुष्पों की रंगत और मनभा...
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Tuesday, August 19, 2014

तो जी ही लूंगा

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मुख फेर रहे हो क्यों मुझसे,जा रहे हो क्यूँ हाथ-साथ छोड़ कर ?         सच है!जी नहीं पाओगे तुम भी इस तरह,राह अपनी मोड़ कर। क्यों समेटे लिए ...
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Wednesday, August 13, 2014

मैं हूँ युग युवा

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                          मैं हूँ युग युवा,नित नयी लगन लगा,नव राहों पे बढ़ता जा हूँ, शिक्षा की सीढ़ी,हौसलों के साथ,हर ऊँचाइयाँ चढ़ता जा  हूँ। ...
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Wednesday, August 6, 2014

हे सुस्वादु टमाटर !

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टमाटर का भाव 140 रुपए किलो होने पर !  हे सुस्वादु टमाटर ! आओ जी !  मेरी झोली में भी आ जाओ जी ! दुकानों पर बैठ के इतराते हो, क्यूँ दा...
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Wednesday, July 30, 2014

किस लिए है ?

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ये झरनों की झर-झर,कुछ-कुछ कहती सी क्यूँ है? ये सब नदियां भी कल-कल मचलतीं सी क्यूँ हैं? यूँ बीहड़ सी राहों और रोड़ों संग टकराते-बलखाते, क्...
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Monday, July 21, 2014

मैं चाहती हूँ

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मैं अपने लिए भी ये जहान चाहती हूँ, इस खुले आसमान में उड़ान चाहती हूँ, जन्मी तो माँ से इक बेटे के सदृश्य ही, पर हक़ और ख़ुशी का सैलाब चाहत...
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Monday, July 7, 2014

अंग दान,स्वयं दान,महा दान

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हर सुबह की साँझ है और हर रात का है सवेरा, ये जो जन्म पाया है हमने,चाहे मेरा हो या तेरा, आना भी रुलाई संग,और जाना भी रुलाई संग, इसी बीच भर...
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Thursday, June 26, 2014

देखा जाएगा आखिर

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आज उड़ चला दिल मेरा,न जाने किस ओर किस डगर, मंजिल मिलेगी या नहीं,इक सवाल है पर फिर भी मगर, चल दिया जो अनजानी राह पर,तो फिर लौटना कैसा ? मं...
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Wednesday, June 18, 2014

सर्वस्व समर्पण

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हारता सा यह मन,प्रिय आज मेरा , बन रही हूँ आज मैं कण्ठ-हार तेरा । भावातुर इस हृदय की भाव-सरिता , ऋतुओं की बनकर मैं आज कविता । मुक्ति...
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Thursday, June 12, 2014

दोस्त - दोस्ती

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दोस्त वो जो दोस्ती की हर रस्म निभा ले, साथ दे सदा,दिल से अटूट बंधन बना ले, आपकी उन्नति से जिसे खुशी मिले अपार, आपकी खुशियों को जो अंतर्म...
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Friday, June 6, 2014

सब याद है मुझे

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मित्रों मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका " गृहशोभा " में प्रकाशित हुई है ,आप भी इसे पढ़ें। कुछ-क...
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Monday, May 26, 2014

क्या इसी तरह से

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सामाजिक रस्मों के साथ अपना बना कर, बाबुल के आँगन से अपने आँगन में लाकर, उसकी पलकों के ख़्वाबों में रंग बसा कर,  संग साँसों का रिश्ता जोड़ ...
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Monday, May 19, 2014

प्रेम और जीवन

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प्यार अनूठा एहसास है,बड़ा ही प्यारा,बहुत ही सुंदर , यह रहता हर किसी की,दिल की गहराइयों के अंदर । धर्म-जात की ऊंची-ऊंची दीवारें,न साध सकीं...
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Saturday, May 10, 2014

पेंटिंग

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मित्रों मेरे द्वारा बनाई गई यह पेंटिंग आज के समाचार पत्र NBT नवभारत टाइम्स ( दिनॉंक -10 /5 /2014 )के नई दिल्ली /लखनऊ संस्करण में पेज ...
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Tuesday, April 29, 2014

चलो माफ़ किया

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जानते हो तुम ? कि जिस दिन तुम छोड़ गए थे, मेरे प्यारे सुनहरे से स्वप्न,मुझसे ही रूठ गए थे, कहाँ-कहाँ नहीं ढूँढा मैंने तुम्हें,सब ओर यहाँ-व...
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Wednesday, April 23, 2014

लकीर और वज़ूद

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वक्त के साथ - संसार में तो - चला आया मैं, क्यों आया ?किस लिए आया ? सवाल - जवाबों के साथ,और, समाज की खींची लकीरों के साथ, सामंजस्य बिठ...
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Thursday, April 10, 2014

बंधु ! सब समान हैं

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ये चेहरे अलग-अलग से हैंं दिखते, पर अपने तो इनमें कोई न लगते, ये मोदी,राहुल,माया,केजरीवाल हैं, ये पार्टियां वादों की घालमघाल हैं, वो बो...
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Tuesday, March 11, 2014

बदल रहे हैं हम

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अब आज देखिये कुछ-कुछ तो बदल रहे हैं हम, वक्त के तकाज़े पे कुछ-कुछ सम्हल रहे हैं हम, कुदरत से की जो छेड़-छाड़ तो अच्छा नहीं होगा, माता-पिता ...
Thursday, March 6, 2014

बस रखो विश्वाश

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बसे-बसाए घर क्यूँ बन रहे बंजर, बिखरते हुए लोग,बुझी हुई सी सहर, धीरज तो धर बहेगी,शान्ति की लहर, थम ही जाएगा ये,आखिर तूफ़ान ही तो है। झु...
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Monday, March 3, 2014

अब आ जाओ

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तुम आओ कि तुम बिन , मेरे सभी गाँव वीराने हैं। सूनी हो गईं गलियां सारी , अँखियाँ सूने पनघट सी हैं , सूनी गगरी सा मन मेरा , मन भाव सभी...
Monday, February 17, 2014

चाँद का धरा प्रेम

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आज चाँद देखो तो,कुछ धुंधला हो चला है, न जाने किन ख्यालों में,वो गुम हो चला है, अनेक तारों स्वरुप उलझे,ख्यालों के संग, टिम-टिम चमकते भाव,...
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Tuesday, February 11, 2014

कैसी ये रीत

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दिल मेरा और राज़ आपका,कैसी ये रीत है , मेरी ही हार इसमें,और आपकी ही जीत है , मन के तारों का जुड़ना,इक मीठा संगीत है , ये जीवन कि मधुरता,ये...
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Thursday, February 6, 2014

कब तक

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एक और नया दिन, मैं बैठी हूँ लाइब्रेरी में आज मेरी बारी है- लाइब्रेरी सम्हालने की, काश ! सोचने की भी कोई बारी होती कोई सीमा होती, द...
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Tuesday, January 28, 2014

शायद जान लूं तुम्हें

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आपके ख्यालों की इक अजनबी,अनजानी सी डोर , खिंच चला मन मेरा बरबस,बेबस सा आपकी ओर। आप ऐसे हैं,वैसे हैं,कैसे हैं,या फिर चाहे जैसे भी हैं , ...
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Monday, January 20, 2014

तुम सही थे मैं गलत

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तुम धारा के विपरीत चलने की आदत के अनुसार, उतर पड़े जानने को कि न जाने क्या है नया उस पार । मैं ताकता,मन मसोसता और सोचता ही रह गया, अजब ...
Monday, January 13, 2014

फ़र्क तो है

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बेटा जन्मा तो - लड्डू बंटेंगे ,थाली बजाई जाएगी, ढोलक की थाप पर सोहर भी गई जाएगी, दादा-दादी हर्षेंगे,कि उनकी वंशबेल बढ़ जाएगी, खानदान बढ़...
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Wednesday, January 8, 2014

नववर्ष की भोर

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वो देखो तो चीर कर अन्धकार घनघोर , थामे हांथों में चमकती किरणों कि डोर , दौड़ती आ रही लहरों के रथ पर  सवार, बीती रात्रि को हरा आ रही नवेली...
Monday, December 16, 2013

ये जो भीड़ है

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 ये जो भीड़ है -  न जाने कहाँ से आती है और न जाने कहाँ को जाती है, सुबह होने के साथ ही सड़कों,चौराहों पे नज़र आती है। कुछ आदमी,कुछ औरत और ...
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Monday, December 9, 2013

अंजाना एहसास

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जब उस दिन गहरे नयनों की मैं कुछ भाषा पहचान सकी बस,तबसे इस जीवन दुःख की मैं कुछ सार्थकता जान सकी ।  बरबस बरस पड़े नयन घन उसके जाने के ब...
Saturday, November 30, 2013

गर हम न होंगे

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मित्रों ! मेरी यह रचना आज के समाचार पत्र नवभारत टाइम्स ( नई दिल्ली / लखनऊ संस्करण ) के दिनॉंक - 4/5/14 , पृष्ठ संख्या -15 पर प्रकाशित ह...
Monday, November 18, 2013

बस तेरा

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बगिया के अनगिन फूलों में,अनेकों हैं रंग भरे, पर हाथ में जो फूल तेरे,बस वही फूल तेरा है। हज़ारों असफलताओं में,एक जो सफलता है, नाम जो अमर ...
Wednesday, November 6, 2013

ढलने तो दो

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नज़रों से नज़रों को,मिलने तो दो, दिल की कलियों को,खिलने तो दो । शामों को ख्यालों से,महकने तो दो, रातों में ख्वाबों को,बहकने तो दो । इन ...
Thursday, October 24, 2013

गर क़ुबूल है

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मित्रों ! मेरी यह रचना दिल्ली पत्र प्रकाशन प्र० लिमिटेड द्वारा प्रकाशित " गृहशोभा " पत्रिका में प्रकाशित हुई है।आप भी इसे पढ़ें -...
Tuesday, October 1, 2013

पर्यावरण व्यवहार

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सबके है,मन को भाए,प्रकृति की ये,हरी-भरी कोमलता, स्वच्छ हवा की भीनी खुशबू,और चिड़ियों की विह्वलता, पुष्प लताओं और हरियाली से,किसका मन नहीं...
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Wednesday, August 14, 2013

मेरा स्वतंत्र भारत

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स्वतंत्र मेरे भारत देश की,स्वतंत्रता महान हो, विश्व पटल पे मेरे देश की,ऊँचाइयाँ बखान हों । नई ऊंचाइयां गढ़ डालें,ऐसी बेटियाँ महान हों, ...
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Friday, June 28, 2013

अब रोक ले अपना क्रोध

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हे माँ धरती ! अब रोक ले सभ्यता निगलती,गरजती,अपनी गंगा ये , और अब तू थाम ले,अपने फिसलते ऊँचे-ऊँचे पर्वत ये। हमने अज्ञानता में आकर,जो क...
Saturday, June 22, 2013

उफ्फ नेता जी

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कहिये नेता जी आपका कैसा और क्या हाल है, क्यों दीखते परेशांन हैं और क्यों हाल बेहाल है, क्यों कर डाले इतने घोटाले,कांड और हवाला, अब झुलस...
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Thursday, June 6, 2013

क्रिकेट और सट्टा

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अरे ओ सट्टेबाजों ये तुमने कैसा किया घोटाला, पूरा का पूरा क्रिकेट मैच ही पैसों से खरीद डाला, बीसीसीई के सारे अधिकारी भी तकते ही रह गए, और...
Monday, June 3, 2013

क्यों भला

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जिस तरह से चले गए हो तुम,ऐसे भी कोई जाता है भला ? सावन के बीच भी कोई,क्या वीराने के गीत गाता है भला ? अभी बस एक ही साल तो हुआ था,मुझे तु...
Thursday, May 30, 2013

चाय की प्याली

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चाय की प्याली,बड़ी निराली,इसकी महिमा किसने है टाली, पियें-पिलायें,मित्र बनाएं,संग पड़ोसी हों या हो प्यारी घरवाली। इसमें कई बड़े-बड़े उलझे हैं...
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Monday, May 27, 2013

आपका ख़याल

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मित्रों ! मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन प्रा लिमिटेड,नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित " मुक्ता " अगस्त 2013 के अंक में प्रकाशि...
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