ज़िन्दगी रंग शब्द Jaishree Verma

Saturday, November 30, 2013

गर हम न होंगे

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मित्रों ! मेरी यह रचना आज के समाचार पत्र नवभारत टाइम्स ( नई दिल्ली / लखनऊ संस्करण ) के दिनॉंक - 4/5/14 , पृष्ठ संख्या -15 पर प्रकाशित ह...
Monday, November 18, 2013

बस तेरा

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बगिया के अनगिन फूलों में,अनेकों हैं रंग भरे, पर हाथ में जो फूल तेरे,बस वही फूल तेरा है। हज़ारों असफलताओं में,एक जो सफलता है, नाम जो अमर ...
Wednesday, November 6, 2013

ढलने तो दो

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नज़रों से नज़रों को,मिलने तो दो, दिल की कलियों को,खिलने तो दो । शामों को ख्यालों से,महकने तो दो, रातों में ख्वाबों को,बहकने तो दो । इन ...
Thursday, October 24, 2013

गर क़ुबूल है

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मित्रों ! मेरी यह रचना दिल्ली पत्र प्रकाशन प्र० लिमिटेड द्वारा प्रकाशित " गृहशोभा " पत्रिका में प्रकाशित हुई है।आप भी इसे पढ़ें -...
Tuesday, October 1, 2013

पर्यावरण व्यवहार

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सबके है,मन को भाए,प्रकृति की ये,हरी-भरी कोमलता, स्वच्छ हवा की भीनी खुशबू,और चिड़ियों की विह्वलता, पुष्प लताओं और हरियाली से,किसका मन नहीं...
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Wednesday, August 14, 2013

मेरा स्वतंत्र भारत

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स्वतंत्र मेरे भारत देश की,स्वतंत्रता महान हो, विश्व पटल पे मेरे देश की,ऊँचाइयाँ बखान हों । नई ऊंचाइयां गढ़ डालें,ऐसी बेटियाँ महान हों, ...
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Friday, June 28, 2013

अब रोक ले अपना क्रोध

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हे माँ धरती ! अब रोक ले सभ्यता निगलती,गरजती,अपनी गंगा ये , और अब तू थाम ले,अपने फिसलते ऊँचे-ऊँचे पर्वत ये। हमने अज्ञानता में आकर,जो क...
Saturday, June 22, 2013

उफ्फ नेता जी

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कहिये नेता जी आपका कैसा और क्या हाल है, क्यों दीखते परेशांन हैं और क्यों हाल बेहाल है, क्यों कर डाले इतने घोटाले,कांड और हवाला, अब झुलस...
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Thursday, June 6, 2013

क्रिकेट और सट्टा

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अरे ओ सट्टेबाजों ये तुमने कैसा किया घोटाला, पूरा का पूरा क्रिकेट मैच ही पैसों से खरीद डाला, बीसीसीई के सारे अधिकारी भी तकते ही रह गए, और...
Monday, June 3, 2013

क्यों भला

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जिस तरह से चले गए हो तुम,ऐसे भी कोई जाता है भला ? सावन के बीच भी कोई,क्या वीराने के गीत गाता है भला ? अभी बस एक ही साल तो हुआ था,मुझे तु...
Thursday, May 30, 2013

चाय की प्याली

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चाय की प्याली,बड़ी निराली,इसकी महिमा किसने है टाली, पियें-पिलायें,मित्र बनाएं,संग पड़ोसी हों या हो प्यारी घरवाली। इसमें कई बड़े-बड़े उलझे हैं...
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Monday, May 27, 2013

आपका ख़याल

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मित्रों ! मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन प्रा लिमिटेड,नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित " मुक्ता " अगस्त 2013 के अंक में प्रकाशि...
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Wednesday, May 22, 2013

ऐसा करते हैं कि -

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 ऐसा करते हैं कि - चलो इक गीत गुनगुनाएं- मधुर-सुरीले सुर छंदों संग इसे सजाएं, के प्रेम की लय झलके प्रतिपल जिसमें, ऐसा इक जादुई सा सुर-...
Monday, May 20, 2013

रिश्तों का खेल

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जन्म के साथ ही ये रिश्ते जन्मे, और मात-पिता के सपने चमके, नामकरण कर पहचान इक बनाई, और किताबों की शिक्षा पूर्ण कराई। थोडा बढ़ा जब तरुणाई...
Wednesday, May 15, 2013

भला लगता है

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सावन की हरियाली बीच, और फूलों भरी क्यारी बीच, मतवाले भ्रमरों की गुन-गुन संग, प्यारा सा प्यार का इज़हार भला लगता है। घनघोर घटाओं बीच, ...
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Monday, May 13, 2013

बस थोड़ा सा

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चाय के प्याले में चाहिए थोड़ी सा शक्कर, बहुत सीधे रास्तों में बस थोड़ा सा चक्कर। दाल की कटोरी में बस हो थोड़ा सा नमक, कपड़ों को चाहिए बस थो...
Monday, May 6, 2013

सवाल

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दोस्तों !मेरी यह कविता " सवाल " इस बार की " सरिता " मैगज़ीन में ( पृष्ठ संख्या -115 ) पर प्रकाशित हुई है!आप लोग भी ...
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Friday, May 3, 2013

परिश्रमी सूरज

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रात्रि माँ की गोद से उछला,प्यारा,सुबह का सूरज धीरे-धीरे, आँखें मलता, अंगड़ाई संग,गुनगुनी मुस्कुराहट धीरे-धीरे। चिड़ियों को उठाया,पशुओं को ...
Wednesday, May 1, 2013

जागृति

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पाकिस्तान क्यों आतंक फैलाये?क्यों चीनी सेना भड़के ? क्यों नहीं हम रणनीति बनाते,दिखाते क्यों नहीं लड़के ? वो कई किलोमीटर आगे आकर के,हमको हुं...
Tuesday, April 30, 2013

वर्षा की आस

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 मित्रों मेरी यह रचना " वर्षा की आस " आज के समाचार पत्र अमर उजाला ( दिनाँक - 4 /7 /2014, दिन- शुक्रवार ) की पत्रिका  " रूप...
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Saturday, April 27, 2013

तुमसे

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तुम आये तो जैसे कि- ठहरे पानी में,कंकड़ फेंका हो किसी ने, कि जैसे मन बगिया,खिल उठी हो महकी सी, कि जैसे फूल खिले हों,रंग-बिरंगे भावों भरे,...
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Monday, April 22, 2013

मेरा सच्चा मित्र

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मेरे आँगन की गोदी में इक,रहता वृक्ष निराला है, मैंने ये हरा-भरा सा वृक्ष,बड़े ही यत्नों से पाला है, यह मेरा जीवन सत्य बना है,मैं इसका हूँ...
Thursday, April 18, 2013

जीत और हार

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जीतो तो ऐसे- कि जिसमें, पसीना बहा हो तुम्हारा, कि तुमने जो देखा था कभी, वो सपना सच हुआ हो तुम्हारा, कि जिसमें दंभ न हो तनिक भी, कि क...
Monday, April 15, 2013

अनमोल हंसी

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खूबसूरती बढ़ाती है ये,जीवन जीना सिखाती है हंसी, हंसिये,हंसाइये,क्योंकि जीवन सरल,बनाती है हंसी, ईश्वर ने केवल मानव को ही,बक्शी है यह नियाम...
Monday, April 8, 2013

बेबसी

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वक्त के हाथों नचाये गए,हम बेबस से कारिंदे, मन के बोझिल गाँवों बीच,उड़ते यादों के परिंदे, तुम्हारी छवि की कुछ,अस्पष्ट सी फुसफुसाहट, और प्...
Friday, April 5, 2013

गौरैया री

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गौरैया तुम हर फागुन में,न जाने कहाँ से आती हो ? मेरे घर की भीत-सुराख़ में,अपना नीड़ बनाती हो, तिनका-तिनका यहाँ-वहाँ से,ढूँढ- ढूँढकर लाती ह...
Saturday, March 30, 2013

साँसों की डोर

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साँसों की डोर पर इस जीवन के खेल, उजियारे सुख अंधियारे दुखों का मेल। न आना मर्ज़ी से और,न ही जाना मर्ज़ी से, जीवन इक नाटक और पात्रों की ख...
Thursday, March 28, 2013

होली

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इस होली पर्व के इंतज़ार में, इस फागुनी सी हुई बयार में, नव युवाओं के दिल भाव डोलें, रह-रह के मन के राज़ खोलें। जलती होलिका की आग में, ...
Saturday, March 23, 2013

न जाने कहाँ

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तुम चले गए वहाँ, न जानूं मैं, कैसा,कौन सा सफर, न जाने कैसी वो दुनिया,कैसे उसके शाम और सहर ? बस कह दिया-चलता हूँ,कहा सुना सब माफ़ करना, मै...
Monday, March 18, 2013

रूमानी हो जाइये

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होली के कई रंगों में,रंगों के छंद घोल, छंदों संग बहक कर,होली गीत गाइए, छोटा-बड़ा छोड़,अपनत्व बीज रोपकर, हंसिये-हंसाइये,थोड़े रूमानी हो जा...
Wednesday, March 13, 2013

बापू मुझे आने दो

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हंसने दो हँसाने दो,नए गीत सार्थक बनाने दो, सृष्टि की देन हूँ मैं,मुझे जीवन गुनगुनाने दो, नन्ही सी निर्दोष हूँ,पापा-मम्मी तो बुलाने दो, ...
Monday, March 4, 2013

पुनर्जन्म

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पत्ता-कांपा,टूटा,बिछड़ा,गिरा,उड़ चला कहीं डाल से दूर, बोला-नियति में साथ अपना इतना ही,मैं हूँ अब मजबूर, जा रहा हूँ वहां,जहाँ मुझे खुद भी नह...
Thursday, February 14, 2013

तू और मैं

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तू और मैं, क्या हैंऔर कौन हैं ? कब से हैं ? कब तक हैं ? प्रश्न से उत्तर तक या, उत्तर के प्रश्न तक ? आसमान से धरती,और , धरती के कण-...
Friday, February 8, 2013

इंतज़ार और सपने

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                माँ! इंतज़ार ही, तुम्हारी किस्मत क्यों है ? कभी पापा का इंतज़ार, कभी स्कूल से हमारे लौटने का इंतज़ार, क्यों मेरी एक झलक ...
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Tuesday, February 5, 2013

रंग भरे सपने

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मित्रों मेरी यह रचना " रंग भरे सपने " समाचार पत्र " अमर उजाला " की " रूपायन "में आज प्रकाशित हुई है, आप भी ...
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Friday, July 27, 2012

वर्तमान में

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                                                                     जो बीत गया सो वो जाने दो , जो आ रहा वो स्वीकार करो , ये वर्तमान ज...
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Thursday, June 14, 2012

झंझावात

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                                                       अपने उलझे मन की गुत्थी सुलझाओ, अब बस तुम इन पीड़ाओं से पार पाओ, देखो तो सब कुछ नही...
Wednesday, April 25, 2012

बंदिश

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                                                                 विवाह-  जन्मों का बंधन,पर उसके कैसे हैं ये ढंग? जीना था मुझको भी अप...
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Tuesday, April 17, 2012

आस

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                                                                       संकल्प लिया तो, जलने दो मशाल, मशाल से मशाल को जगाने दो, मनो...
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