Thursday, June 8, 2017

वही वादे वही कसमें

जन्म लेने के साथ ही जन्मी,
मेरी पहचान इस दुनिया में,
अजब विस्मित करें ये बातें,
जीवन मेरा ख्वाहिशें उनकी,
तमाम उम्मीदों के संग पालें,
वही मेरे वही अपने।
उंगली पकड़ के यूँ चलना,
सदा,नहीं मंजूर मुझको तो,
मुझे आवाज़ दे बुलाती राहेँ,
खुद की तकदीर गढ़ने को,
कोई न पूछे मेरी ख्वाहिश,
वही रोना वही झगड़े।

अचकचा के मैने चुन ली हैं,
अपने अन्तर्मन की जो राहें,
किसीके रोके से नहीं रुकना,
किसी के आगे नहीं झुकना,
कदम जिस भी ओर बढ़े मेरे,
वही मंजिल वही राहें।

कई मौसम फिर ऐसे बदले,
तमाम इंद्रधनुष भी मचले,
तमाम बातें हुईं दिलबर से,
तमाम बीतीं रंगीन सी शामें,
फिर वो इन्तजार सदियों का,
वही गाने वही नगमे।

सारी रात के रहे वे रतजगे,
सपने सोए से कुछ अधजगे,
ये झूमें दिल मेरा किस ओर,
पुकारे उसे बिना ओर छोर,
भटकूं मैं मृग मरीचिका में,
वही अगन वही तड़पन। 

वही बिखरना मुहब्बत का,
वही हतप्रभ सी जिंदगानी,
फिर नाम दिया उसे धोखा,
यही हर जवानी की कहानी,
बस वही हर बार का रोना,
वही फरेब वही बाहें।

फिर वो गृहस्थी की चक्की,
वही फिर कपड़े,रोटी की दौड़,
नई पीढ़ी की फिर से चिन्ता,
वही अधेड़ावस्था का मोड़,
बस जिम्मेदारियों का रोना,
वही झंझट वही लफड़े।

वही अंतिम छोर पे हूँ खड़ा,
विस्मित हुआ अब खुद से,
गलत सा चुन लिया जीवन,
नहीं सोचा था ये ऐसा कुछ,
ये कैसा है छल ज़िंदगानी का,
वही अफसोस वही आँसू।

अजब सी पहेली है ज़िंदगानी,
एक सी लगे सबकी कहानी,
सुख दुःख का बहता सा पानी, 
कहीं जन्मे और बस बह चले,
बिन मंजिल की अजब यात्रा, 
वही आना वही जाना।
                            
                             
                                                     ( जयश्री वर्मा )

2 comments:

  1. This one is awesome jaishree ji....Best of all your poems I have read till now...

    ReplyDelete
  2. कविता की सराहना लिए सादर धन्यवाद आपका संजय भास्कर जी !

    ReplyDelete