Wednesday, January 18, 2017

हमारे बाँकुरे जवान

जिनसे अपनी है सुबह शाम,वो हैं सीमाओं पर खड़े हुए,
वो प्रहरी वो सीमा रक्षक,वो जवान सीमाओं पर डटे हुए।



उनके होने से हम बेफिक्र,उनसे सुरक्षित अपना सम्मान,
उनके लिए तो बस सर्वोपरि,देश की-आन,बान और शान।

उनका भी तो है घर-द्वार,और उनका भी है अपना परिवार,
पर देश है उनकी प्राथमिकता,देश ही उनका सच्चा प्यार।

उनके लिए दिन-रात एक हैं,हरदम,हरपल सचेत वो रहते,
भारत माँ की रक्षा करने को,हंस-हंस कर सब कुछ सहते।

चाहे आंधी हो,या तूफान चले,चाहे बरसें तीखे बर्फ के गोले ,
हो कैसा भी संकट,रुकावट,वो साहस संग सबकुछ सहलें।

दुश्मन कितनी कोशिश कर ले,पर इरादों को न डिगा सके,
हिम्मत उनकी है फौलादी,उन्हें कोई भी चुनौती न डरा सके,



प्राणों की बाजी लगा,शत्रुओं को हराएं ऐसे हैं बाँकुरे जवान,
तब स्वतंत्र हवा में सांस हम लेते,हमारे सपने चढ़ते परवान।

उनकी उम्मीद,तसल्ली उनके परिवार की चिट्ठी से जुड़ी है,
और घर जाने की छुट्टी स्नेह और उम्मीद से जुड़ी-कड़ी है।

रहे ये अमर जवान ज्योति सदा,हो सुरक्षित देश की आवाम,
हे वीरों ! शत-शत नमन तुम्हें,है मेरा शत-शत तुम्हें सलाम।

                                                                                       ( जयश्री वर्मा )









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