Friday, June 6, 2014

सब याद है मुझे

मित्रों मेरी यह रचना दिल्ली प्रेस पत्र प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पत्रिका " गृहशोभा " में प्रकाशित हुई है ,आप भी इसे पढ़ें।


कुछ-कुछ याद है मुझे,वो बीते वक्त की मीठी बातें, 
बेकाबू सी दिल की धड़कन,और वो सुवासित साँसें,
जीवन की जद्दोजहद के बीच,बेसाख्ता भागते हुए से,
तुमने कुछ कहा था,और मैंने उन लम्हों को बुना था।

कुछ मीठी सी सुर लहरियाँ थीं,तुमने जो गुनगुनाई थीं,
मेरे करीब जैसे बहुत से वादे,बहुत सी कसमें खाईं थीं,
जैसे बहुत सारे नज़ारे,बहुत सारी खिली सी बहारें थीं,
तुम्हारे कहे उन तमाम छंदों को,मैंने गीतों में सुना था।

कुछ सपने थे रंगीले-सजीले से,जो तुमने ही दिखाए थे,
हांथों में हाथ ले अपने जो तब,तुमने मुझे समझाए थे,
वो अटूट विश्वास और नयी आस में,रचे-बसे से सपने,
उन सपनों का रंग मेरी उन,जागती रातों में ढला था ।

कुछ नए रास्ते थे जो गुज़ारे थे,तुमने-हमने संग में,
क़दमों से कदम मिला सँवारे थे,तुमने-हमने संग में,
वो मौन रह कही गयी बहुत सारी बातें और किस्से,
उन रास्तों का अपनापन मेरी मंज़िलों में ढाला था।

ये धड़कनें भी एक थीं,और अपनी चाहतें भी एक थीं,
ईश्वर का संग था और,ज़माने की निगाहें भी नेक थीं,
इसी लिए तो आज हम साथ हैं,ऐ मेरे प्यारे हमसफ़र,
अब ज़िन्दगी हमारी है और,हमारे हैं सारे सांझ-सहर।

सब कुछ याद है वो बीते वक्त का,गुज़ारना चुपके,
शुरूआती उहापोह में बढ़ना और सम्हालना छुपके,
तुम्हारी इक नज़र पर,मेरे अरमानों का वो मचलना,
उन इशारों को मैंने,दिल की गहराइयों से गुना था।

                                                                                            ( जयश्री वर्मा )





4 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति !
    आज आपके ब्लॉग पर आकर काफी अच्छा लगा अप्पकी रचनाओ को पढ़कर , और एक अच्छे ब्लॉग फॉलो करने का अवसर मिला !

    मेरे ब्लॉग की नवीनतम रचनाओ को पढ़े और अगर आपको सही लगे तो फॉलोवर बनकर कमेंट के रूप में सुझाव देकर हमारा मार्दर्शन करें !

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    1. मेरी रचनाओं पर आपके बहुमूल्य विचारों से अवगत होकर अच्छा लगा ! धन्यवाद आपका संजय भास्कर जी !

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  2. Replies
    1. बहुत-बहुत धन्यवाद आपका सुशील कुमार जोशी जी !

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