Tuesday, February 12, 2013

कुछ-कुछ

       

 खुशी 

पतझर के बीच छाई,
बसंत सी -
हँसी,
फिसल गई,
मुट्ठी से,
रेत सी -
खुशी ।

सम्बन्ध

स्नेह के धागे में,
अविश्वास का-
बंध,
टूट गया खिंचने से,
प्यारा -
सम्बन्ध।

इंतज़ार 

हर सहर कहे,
वह -
आज आएगा,
हर शाम कहे,
वह -
बेवफा निकला।

                        ( जयश्री वर्मा )



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