Monday, April 16, 2012

जीवन सत्य

                                                                         
पतझर नहीं तो बोल रे मानुस,
बसंत का है क्या मोल ?
फिर जीवन ठूठ सा क्यों कहता ?
जीवन पुष्प सा तू बोल।
दुःख न हो तो बोल रे मानुस,
सुख का है क्या मोल,
फिर जीवन अश्क सा क्यों कहता ?
जीवन आस सा तू बोल।

दर्द न हो तो बोल रे मानुस,
हंसी का है क्या मोल,
फिर जीवन श्राप सा क्यों कहता ?
जीवन छंद सा तू बोल।

जरा नहीं तो बोल रे मानुस,
यौवन का है क्या मोल,
फिर जीवन बोझ सा क्यों कहता ?
यह जीवन उमंग सा तू बोल।

मृत्यु नहीं तो बोल रे मानुस,
जन्म का है क्या मोल,
फिर जीवन क्षणभंगुर क्यों कहता,
जीवन अमरत्व  सा तू बोल ।  
                                                           ( जयश्री वर्मा )